मोह-माया छोड़ आध्यात्म की राह पर इशिका तनेजा: पूर्व मिस वर्ल्ड टूरिज्म ने ली गुरु दीक्षा

मोह-माया छोड़ आध्यात्म की राह पर इशिका तनेजा: पूर्व मिस वर्ल्ड टूरिज्म ने ली गुरु दीक्षा
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ग्लैमर की दुनिया से त्याग और साधना तक का सफर

पूर्व मिस वर्ल्ड टूरिज्म और अभिनेत्री इशिका तनेजा ने शोबिज की चकाचौंध भरी दुनिया को अलविदा कहकर आध्यात्मिक जीवन अपनाने का बड़ा निर्णय लिया है। एक समय ग्लैमर, फैशन और फिल्मों की दुनिया में चमकने वाली इशिका अब तप और त्याग की राह पर हैं। बीते हफ्ते, मध्य प्रदेश के जबलपुर में उन्होंने शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में गुरु दीक्षा लेकर आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की।


इशिका का आध्यात्मिक परिवर्तन

ग्लैमरस जीवनशैली से दूर होते हुए इशिका ने एक नई राह चुनी है। उन्होंने कहा, "आज के युवाओं को धर्म और अध्यात्म की ओर बढ़ना चाहिए। इस मार्ग पर चलने से जीवन में सच्चा सुख और शांति मिलती है।" इशिका का यह कदम केवल उनका निजी निर्णय नहीं है, बल्कि यह समाज, विशेषकर युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।


सोशल मीडिया पर दिखा नया दृष्टिकोण

जहां कभी इशिका का सोशल मीडिया प्रोफाइल ग्लैमरस तस्वीरों और फैशन से भरा रहता था, अब वहां धार्मिक विचार और आध्यात्मिक संदेश प्रमुखता से देखे जा सकते हैं। इशिका ने अपने पोस्ट्स के जरिए यह संदेश दिया है कि भौतिक सुख और मोह-माया से ऊपर उठकर सच्ची खुशी आध्यात्म में है।


गुरु दीक्षा और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत

शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज से गुरु दीक्षा लेकर इशिका ने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत की है। यह दीक्षा उनके लिए केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सत्य की खोज का मार्ग है। उन्होंने इस निर्णय को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण कदम बताया।


युवाओं के लिए संदेश

इशिका ने युवाओं से आग्रह किया कि वे धर्म और अध्यात्म की ओर रुख करें। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी भौतिकता और प्रतिस्पर्धा में उलझकर अपने वास्तविक उद्देश्य को भूल रही है। अध्यात्म जीवन में संतुलन और आत्मिक शांति लाने का माध्यम है।


इशिका तनेजा का यह कदम उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो भौतिकता के बंधन से मुक्त होकर सच्ची शांति की तलाश में हैं। उनका जीवन बदलाव न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में भी सकारात्मक संदेश फैलाने वाला है। आध्यात्मिकता की ओर उनका यह सफर यह दिखाता है कि सफलता का वास्तविक अर्थ आंतरिक शांति और संतोष में निहित है।

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